मश्हूर अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया है। वह गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर पर बेहोश पाए गए और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 75 साल के नाना पाटेकर के निधन की खबर से सभी सदमे में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाटेकर को सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर मृत घोषित किया गया। शुरुआती जांच के मुताबिक उनका निधन कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ है।
नाना पाटेकर का कारगिल वाला किस्सा जो आप नहीं जानते
एक्टर नाना पाटेकर लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रहे और अब तक कई यादगार व दमदार किरदार निभा चुके हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि नाना पाटेकर एक भारतीय प्रादेशिक सेना अफसर भी रहे हैं? प्रसिद्ध अभिनेता ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के साथ लगभग 60 दिन बिताए थे।

सेना की QRT में थे नाना
नाना पाटेकर ने साल 1991 में आई फिल्म 'प्रहार' में मेजर प्रताप चौहान का रोल प्ले किया था, पर असल में वह भारतीय सेना का हिस्सा रहे हैं और उसे अपनी सेवाएं दे चुके हैं। नाना ने बताया था, 'मैं क्विक रिएक्शन टीम का सदस्य बन गया। यह सबसे विशिष्ट ताकतों में से एक है। इतना सा तो कुछ हम कर सकते हैं देश के लिए। हमारा सबसे बड़ा हथियार बोफोर्स या एके नहीं बल्कि हमारे जवान हैं।'
बॉलीवुड सुपरस्टार जो LOC पर गश्त लगाता था...
अपनी फिल्म 'प्रहार' की शूटिंग और ट्रेनिंग के सिलसिले में उन्होंने पहले ही मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ ट्रेनिंग ली थी। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस से मिलकर सेना के साथ जाने की अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने के बाद वे द्रास, लेह, कुपवाड़ा, बारामूला और सोपोर जैसे इलाकों में भारतीय सेना की 'क्विक रिएक्शन टीम' (QRT) का हिस्सा रहे। उन्होंने वहां गश्त लगाने और घायल जवानों की मदद करने का काम किया।

कारगिल युद्ध में 60 दिन का सफर, वजन 76 से 56 किलो
एक्टर ने खुद खुलासा किया था कि उन्होंने मुगलपुरा, द्रास, लेह, कुपवाड़ा, बारामूला और सोपोर में पोस्टेड रहे। एक्टर ने अस्पताल बेस में भी काम किया था। इस जंग ने उन्हें काफी प्रभावित किया था। इस दौरान नाना पाटेकर का 20 किलो से अधिक वजन कम हो गया था। उन्होंने बताया था, 'जब मैं श्रीनगर पहुंचा तो मेरा वजन 76 किलोग्राम था। जब मैं वापस आया तो मेरा वजन 56 किलोग्राम हो गया।' बता दें, एक्टर को आर्मी में हॉनरी कैप्टन की पोस्ट दी गई, जिससे वो 62 साल की उम्र में रिटायर हुए।
दांव पर लगाया था करियर
कारगिल युद्ध को आधुनिक भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है। यह युद्ध भारत और पड़ोसी देश पाकिस्तान के बीच आखिरी प्रमुख लड़ाई थी। इस लड़ाई में जब जवान अपनी जान की बाजी लगाकर मातृभूमि की रक्षा के लिए अग्रिम मोर्चे पर लड़ रहे थे तो देश के बाकी लोग भी उनका साथ देने के लिए आगे आए। कुछ लोग आर्थिक मदद के लिए आगे आए तो कुछ ने उनका मनोबल बढ़ाने के लिए जयकारे लगाए। इसी बीच नाना पाटेकर ने अपने अभिनय करियर को ताक पर रख दिया था। उस दौर में तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता रहे एक्टर ने करियर के चरम पर फिल्मों से किनारा किया और भारतीय सेना में फ्रंटलाइन वॉरियर के रूप में देश की सेवा करने पहुंच गए।
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